दीपावली पर इस साल जैसी ही परिस्थिति 1963 में भी हुई थी, तब पिछले दिन ही दीपावली हुई थी। देश के पुराने श्री मद् बापूदेव शास्त्री पंचांग की 1963 की फोटो संलग्न है।

दीपावली पर इस साल जैसी ही परिस्थिति 1963 में भी हुई थी, तब पिछले दिन ही दीपावली हुई थी। देश के पुराने श्री मद् बापूदेव शास्त्री पंचांग की 1963 की फोटो संलग्न है। 

◆◆◆ सन् 1963 में ◆◆◆

16 अक्टूबर 1963 में अमावस्या सायंकाल 16:15 पर प्रारंभ हो रही है एवं 17 अक्टूबर 1963 को अमावस्या सायंकाल 18:13 पर समाप्त हो रही है व सूर्यास्त 17:29 को है पर दीपावली 16 अक्टूबर को ही लिखी गई क्योंकि उस दिन ही पूरे प्रदोष व अर्धरात्रि में है। 

1963 व 2024 में तो अमावस्या का अंत व सूर्यास्त एक समान है, 2024 में 1 नवंबर को सूर्यास्त 17:32 अमावस्या अंत 18:16 पर है। पर 1963 में पिछले दिन ही दीपावली की गई थी क्योंकि अगले दिन दूषित प्रदोष, प्रदोष में दर्श नहीं, रजनी में एक दण्ड अमावस्या का योग नहीं, प्रदोष में अमा व्याप्ति नहीं, अर्धरात्रि में अमावस्या नहीं थी, यह सब पिछले दिन पूरी तरह मिल रहा था, इस साल भी मिल रहा है।

1963 के इन प्रमाणों से स्पष्ट है कि परंपरा के अनुसार 31 अक्टूबर 2024 को ही दीपावली शास्त्रसम्मत है,

 अन्यथा क्या आज ज्यादा विद्वान हो गए हैं या पहले के आचार्य व पंचांगकार शास्त्र नहीं जानते थे?

 आज से 60 साल पहले के ये पंचांग हैं जब पंचांग की एक एक चीज हाथों से की जाती थी न कि आज की तरह कॉपी पेस्ट की जाती थी। 

पूरे देश की परंपराओं को खण्डित करने का षड्यंत्र चल रहा है और आप सब इस गम्भीर विषय पर मौन हैं।

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